अन्वयः
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यत्-सकाशात् लाभाः न स्यात् केवलाः विपत्तयः स्युः सः स्वामी अनुजीविभिः विशेषात् दूरतः त्याज्यः ।
Summary
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A master from whom no gains are expected, but only calamities arise, should be abandoned from afar, especially by his dependents.
सारांश
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जिस स्वामी से कोई लाभ न मिले और केवल कष्ट ही प्राप्त हों, सेवकों को ऐसे स्वामी का साथ विशेष रूप से त्याग देना चाहिए।
पदच्छेदः
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| यत् | यद् (५.१) | from whom |
| सकाशान् | सकाश (५.१) | from the presence |
| न | न | not |
| लाभाः | लाभ (१.३) | gains |
| स्यात् | स्यात् (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | may be |
| केवलाः | केवल (१.३) | only |
| स्युः | स्युः (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | may be |
| विपत्तयः | विपत्ति (१.३) | misfortunes |
| स | तद् (१.१) | that |
| स्वामी | स्वामिन् (१.१) | master |
| दूरतः | दूरतस् | from afar |
| त्याज्यः | त्याज्य (√त्यज्+ण्यत्, १.१) | to be abandoned |
| विशेषात् | विशेष (५.१) | especially |
| अनुजीविभिः | अनुजीविन् (३.३) | by dependents |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | त्स | का | शा | न्न | ला | भाः | स्या |
| त्के | व | लाः | स्यु | र्वि | प | त्त | यः |
| स | स्वा | मी | दू | र | त | स्त्या | ज्यो |
| वि | शे | षा | द | नु | जी | वि | भिः |
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