अन्वयः
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यथा दंष्ट्रा-विरहितः सर्पः मद-हीनः गजः च तथा अत्र अर्थेन विहीनः पुरुषः नाम-धारकः ।
Summary
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Just as a snake without fangs or an elephant without musth, a man devoid of wealth in this world remains a man in name only.
सारांश
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बिना धन के पुरुष समाज में केवल नाम का ही रह जाता है, ठीक उसी तरह जैसे जहर के दांतों के बिना सांप और मदहीन हाथी शक्तिहीन होते हैं।
पदच्छेदः
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| दंष्ट्रा-विरहितः | दंष्ट्रा–विरहित (१.१) | undefined |
| सर्पः | सर्प (१.१) | undefined |
| मद-हीनः | मद–हीन (१.१) | undefined |
| यथा | यथा | undefined |
| गजः | गज (१.१) | undefined |
| तथा | तथा | undefined |
| अर्थेन | अर्थ (३.१) | undefined |
| विहीनः | विहीन (१.१) | undefined |
| अत्र | अत्र | undefined |
| पुरुषः | पुरुष (१.१) | undefined |
| नाम-धारकः | नाम–धारक (१.१) | undefined |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दं | ष्ट्रा | वि | र | हि | तः | स | र्पो |
| म | द | ही | नो | य | था | ग | जः |
| त | था | र्थे | न | वि | ही | नो | ऽत्र |
| पु | रु | षो | ना | म | धा | र | कः |
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