अन्वयः
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जलम् यच्छन् जलदः अपि सकल-लोकस्य वल्लभताम् एति नित्यम् प्रसारित-करः मित्रः अपि वीक्षितुम् न शक्यः।
Summary
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By giving water, even a cloud becomes beloved to the whole world; but the sun (Mitra), even though a friend, cannot be looked at because his rays (kara) are always extended like a beggar's hand.
सारांश
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जल देने के कारण बादल सबको प्रिय लगता है, जबकि हाथ (किरणें) फैलाने वाला मित्र (सूर्य) भी निरंतर देखा नहीं जा सकता।
पदच्छेदः
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| यच्छन् | यच्छत् (√यम्+शतृ, १.१) | giving |
| जलम् | जल (२.१) | water |
| अपि | अपि | even |
| जलदः | जल–द (१.१) | cloud |
| वल्लभताम् | वल्लभता (२.१) | belovedness |
| एति | एति (√इ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | attains |
| सकल-लोकस्य | सकल–लोक (६.१) | of all people |
| नित्यम् | नित्य | always |
| प्रसारित-करः | प्रसारित–कर (१.१) | one with extended rays/hands |
| मित्रः | मित्र (१.१) | the sun |
| अपि | अपि | even |
| न | न | not |
| वीक्षितुम् | वीक्षितुम् (वि√वीक्ष्+तुमुन्) | to be seen |
| शक्यः | शक्य (१.१) | able |
छन्दः
आर्या []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | च्छ | न्ज | ल | म | पि | ज | ल | दो | |||
| व | ल्ल | भ | ता | मे | ति | स | क | ल | लो | क | स्य |
| नि | त्यं | प्र | सा | रि | त | क | रो | ||||
| मि | त्रो | ऽपि | न | वी | क्षि | तुं | श | क्यः |
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