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ईश्वरा भूरिदानेन यल्लभन्ते फलं किल ।
दरिद्रस्तच्च काकिण्या प्राप्नुयादिति नः श्रुतिः ॥

अन्वयः AI ईश्वराः भूरि-दानेन यत् फलम् लभन्ते किल दरिद्रः तत् च काकिण्या प्राप्नुयात् इति नः श्रुतिः।
Summary AI We have heard that the fruit which lords obtain through massive gifts, a poor person can attain by giving just a small coin.
सारांश AI शास्त्रों के अनुसार, समर्थ लोग भारी दान से जो फल प्राप्त करते हैं, एक निर्धन व्यक्ति वही फल मात्र एक कौड़ी के दान से प्राप्त कर सकता है।
पदच्छेदः AI
ईश्वराःईश्वर (१.३) The wealthy
भूरि-दानेनभूरिदान (३.१) by a great donation
यत्यद् (२.१) which
लभन्तेलभन्ते (√लभ् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) obtain
फलम्फल (२.१) fruit (merit)
किलकिल indeed
दरिद्रःदरिद्र (१.१) a poor person
तत्तद् (२.१) that
and
काकिण्याकाकिणी (३.१) with a small coin (kakini)
प्राप्नुयात्प्राप्नुयात् (प्र√आप् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) may obtain
इतिइति thus
नःअस्मद् (६.३) our
श्रुतिःश्रुति (१.१) is the scripture
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
श्व रा भू रि दा ने
ल्ल न्ते लं कि
रि द्र स्त च्च का कि ण्या
प्रा प्नु या दि ति नः श्रु तिः
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