अन्वयः
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ग्रासात् अपि तद्-अर्धम् च अर्थिषु कस्मात् न दीयते? इच्छा-अनुरूपः विभवः कदा कस्य भविष्यति?
Summary
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Why is even half a morsel not given to those in need? When has anyone ever possessed wealth exactly according to their desires?
सारांश
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अपने भोजन के ग्रास में से भी आधा हिस्सा याचकों को क्यों नहीं देना चाहिए? इच्छानुसार वैभव और संपत्ति भला कब और किसे प्राप्त हुई है?
पदच्छेदः
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| ग्रासात् | ग्रास (५.१) | from a mouthful |
| अपि | अपि | even |
| तत्-अर्धम् | तत्–अर्ध (२.१) | half of that |
| च | च | and |
| कस्मात् | किम् (५.१) | why |
| न | न | not |
| दीयते | दीयते (√दा भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is given |
| अर्थिषु | अर्थिन् (७.३) | to petitioners |
| इच्छानुरूपः | इच्छा–अनुरूप (१.१) | according to desire |
| विभवः | विभव (१.१) | wealth |
| कदा | कदा | when |
| कस्य | किम् (६.१) | of whom |
| भविष्यति | भविष्यति (√भू कर्तरि लृट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | will be |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ग्रा | सा | द | पि | त | द | र्धं | च |
| क | स्मा | न्नो | दी | य | ते | ऽर्थि | षु |
| इ | च्छा | नु | रू | पो | वि | भ | वः |
| क | दा | क | स्य | भ | वि | ष्य | ति |
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