अन्वयः
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चेत् ते मतिः नरकाय (अस्ति) (तर्हि) वर्षम् यावत् पौरोहित्यम् समाचार किम् अन्येन दिन-त्रयम् मठ-चिन्ताम् (कुरु)।
Summary
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If your mind is set on going to hell, practice the duties of a priest for a year; why do anything else? Or manage a monastery for just three days.
सारांश
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यदि नरक जाने की इच्छा हो तो एक वर्ष तक पुरोहित का कार्य करें, और यदि शीघ्रता हो तो तीन दिन तक मठ का प्रबंधन ही पर्याप्त है।
पदच्छेदः
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| नरकाय | नरक (४.१) | for hell |
| मतिः | मति (१.१) | intention |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| चेत् | चेत् | if |
| पौरोहित्यम् | पौरोहित्य (२.१) | priesthood |
| समाचार | समाचार (सम्+आ√चर् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | perform |
| वर्षम् | वर्ष (२.१) | year |
| यावत् | यावत् | as long as |
| किम् | किम् (१.१) | what |
| अन्येन | अन्य (३.१) | by another |
| मठ-चिन्ताम् | मठ–चिन्ता (२.१) | worry about a monastery |
| दिन-त्रयम् | दिन–त्रय (२.१) | three days |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | र | का | य | म | ति | स्ते | चे |
| त्पौ | रो | हि | त्यं | स | मा | चा | र |
| व | र्षं | या | व | त्कि | म | न्ये | न |
| म | ठ | चि | न्तां | दि | न | त्र | यम् |
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