एह्यागच्छ समाविशासनमिदं कस्माच्चिराद्दृश्यसे
का वार्तेति सुदुर्बलोऽसि कुशलं प्रीतोऽस्मि ते दर्शनात् ।
एवं ये समुपागतान्प्रणयिनः प्रत्यालपन्त्यादरा-
त्तेषां युक्तमशङ्कितेन मनसा हर्म्याणि गन्तुं सदा ॥
एह्यागच्छ समाविशासनमिदं कस्माच्चिराद्दृश्यसे
का वार्तेति सुदुर्बलोऽसि कुशलं प्रीतोऽस्मि ते दर्शनात् ।
एवं ये समुपागतान्प्रणयिनः प्रत्यालपन्त्यादरा-
त्तेषां युक्तमशङ्कितेन मनसा हर्म्याणि गन्तुं सदा ॥
का वार्तेति सुदुर्बलोऽसि कुशलं प्रीतोऽस्मि ते दर्शनात् ।
एवं ये समुपागतान्प्रणयिनः प्रत्यालपन्त्यादरा-
त्तेषां युक्तमशङ्कितेन मनसा हर्म्याणि गन्तुं सदा ॥
अन्वयः
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एहि आगच्छ इदम् आसनम् समाविश कस्मात् चिरात् दृश्यसे का वार्ता इति सुदुर्बलः असि कुशलम् ते दर्शनात् प्रीतः अस्मि एवम् ये समुपागतान् प्रणयिनः आदरात् प्रत्यालपन्ति तेषाम् हर्म्याणि सदा अशङ्कितेन मनसा गन्तुम् युक्तम्।
Summary
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"Come, enter, sit here. Why are you seen after so long? What is the news? You look weak. Is all well? I am delighted to see you." It is right to visit the mansions of those who greet visitors with such respect and affection with an unhesitating mind.
सारांश
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आदरपूर्वक स्वागत करने वाले, कुशल-क्षेम पूछने वाले और स्नेह दिखाने वाले प्रियजनों के घर बिना किसी शंका के हमेशा जाना चाहिए।
पदच्छेदः
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| एहि | एहि (√इ कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | come |
| आगच्छ | आगच्छ (आ√गम् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | come |
| समाविश | समाविश (सम्+आ√विश् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | sit down |
| आसनम् | आसन (२.१) | seat |
| इदम् | इदम् (२.१) | this |
| कस्मात् | किम् (५.१) | from what (reason) |
| चिरात् | चिर (५.१) | for a long time |
| दृश्यसे | दृश्यसे (√दृश् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | are seen |
| का | किम् (१.१) | what |
| वार्ता | वार्ता (१.१) | news |
| इति | इति | thus |
| सुदुर्बलः | सु–दुर्बल (१.१) | very weak |
| असि | असि (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you are |
| कुशलम् | कुशल (१.१) | well-being |
| प्रीतः | प्रीत (√प्री+क्त, १.१) | pleased |
| अस्मि | अस्मि (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I am |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| दर्शनात् | दर्शन (५.१) | from seeing |
| एवम् | एवम् | thus |
| ये | यद् (१.३) | those who |
| समुपागतान् | समुपागत (सम्+उप+आ√गम्+क्त, २.३) | who have arrived |
| प्रणयिनः | प्रणयिन् (२.३) | friends |
| प्रत्यालपन्ति | प्रत्यालपन्ति (प्रति+आ√लप् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | greet in return |
| आदरात् | आदर (५.१) | with respect |
| तेषाम् | तद् (६.३) | their |
| युक्तम् | युक्त (१.१) | proper |
| अशङ्कितेन | अशङ्कित (३.१) | without doubt |
| मनसा | मनस् (३.१) | by mind |
| हर्म्याणि | हर्म्य (२.३) | houses |
| गन्तुम् | गन्तुम् (√गम्+तुमुन्) | to go |
| सदा | सदा | always |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | ह्या | ग | च्छ | स | मा | वि | शा | स | न | मि | दं | क | स्मा | च्चि | रा | द्दृ | श्य | से |
| का | वा | र्ते | ति | सु | दु | र्ब | लो | ऽसि | कु | श | लं | प्री | तो | ऽस्मि | ते | द | र्श | नात् |
| ए | वं | ये | स | मु | पा | ग | ता | न्प्र | ण | यि | नः | प्र | त्या | ल | प | न्त्या | द | रा |
| त्ते | षां | यु | क्त | म | श | ङ्कि | ते | न | म | न | सा | ह | र्म्या | णि | ग | न्तुं | स | दा |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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