अन्वयः
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अ-विश्वस्ते न विश्वसेत् विश्वस्ते अपि न विश्वसेत् । विश्वासात् उत्पन्नं भयम् मूलानि अपि निकृन्तति ।
Summary
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One should not trust the untrustworthy, nor should one place complete trust even in the trustworthy. Fear arising from such trust can cut down even the very roots of one's existence.
सारांश
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अविश्वसनीय पर विश्वास न करें और विश्वसनीय पर भी अति-विश्वास न करें; क्योंकि विश्वास से उत्पन्न भय जड़ को भी काट डालता है।
पदच्छेदः
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| न | न | not |
| विश्वसेत् | विश्वसेत् (√विश्वस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | should trust |
| अविश्वस्ते | अविश्वस्त (७.१) | in one who is not trustworthy |
| विश्वस्ते | विश्वस्त (७.१) | in one who is trustworthy |
| अपि | अपि | even |
| न | न | not |
| विश्वसेत् | विश्वसेत् (√विश्वस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | should trust |
| विश्वासात् | विश्वास (५.१) | from trust |
| भयम् | भय (१.१) | fear |
| उत्पन्नम् | उत्पन्न (√उत्पद्+क्त, १.१) | arisen |
| मूलानि | मूल (२.३) | roots |
| अपि | अपि | even |
| निकृन्तति | निकृन्तति (नि√निकृत् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | cuts off |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | वि | श्व | से | द | वि | श्व | स्ते |
| वि | श्व | स्ते | ऽपि | न | वि | श्व | सेत् |
| वि | श्वा | सा | द्भ | य | मु | त्प | न्नं |
| मू | ला | न्य | पि | नि | कृ | न्त | ति |
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