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शपथैः सन्धितस्यापि न विश्वासं व्रजेद्रिपोः ।
श्रूयते शपथं कृत्वा वृत्रः शक्रेण सूदितः ॥

अन्वयः AI शपथैः सन्धितस्य अपि रिपोः विश्वासम् न व्रजेत्। श्रूयते शक्रेण शपथम् कृत्वा वृत्रः सूदितः।
Summary AI One should not trust an enemy even if bound by oaths. It is said that Śakra killed Vṛtra after making an oath of peace.
सारांश AI शपथ लेने पर भी शत्रु का विश्वास न करें, क्योंकि इंद्र ने शपथ लेने के बाद भी अवसर पाते ही वृत्रासुर का वध कर दिया था।
पदच्छेदः AI
शपथैःशपथ (३.३) by oaths
सन्धितस्यसन्धित (√सन्धा+क्त, ६.१) of one who has made peace
अपिअपि even
not
विश्वासम्विश्वास (२.१) trust
व्रजेत्व्रजेत् (√व्रज् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) one should go
रिपोःरिपु (६.१) of an enemy
श्रूयतेश्रूयते (√श्रु भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) it is heard
शपथम्शपथ (२.१) oath
कृत्वाकृत्वा (√कृ+क्त्वा) having made
वृत्रःवृत्र (१.१) Vritra
शक्रेणशक्र (३.१) by Indra
सूदितःसूदित (√सूद्+क्त, १.१) killed
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
थैः न्धि स्या पि
वि श्वा सं व्र जे द्रि पोः
श्रू ते थं कृ त्वा
वृ त्रः क्रे सू दि तः
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