आरम्भगुर्वी क्षयिणी क्रमेण
लघ्वी पुरा वृद्धिमती च पश्चात् ।
दिनस्य पूर्वार्धपरार्धभिन्ना
छायेव मैत्री खलसज्जनानाम् ॥
आरम्भगुर्वी क्षयिणी क्रमेण
लघ्वी पुरा वृद्धिमती च पश्चात् ।
दिनस्य पूर्वार्धपरार्धभिन्ना
छायेव मैत्री खलसज्जनानाम् ॥
लघ्वी पुरा वृद्धिमती च पश्चात् ।
दिनस्य पूर्वार्धपरार्धभिन्ना
छायेव मैत्री खलसज्जनानाम् ॥
अन्वयः
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आरम्भ-गुर्वी क्रमेण क्षयिणी पुरा लघ्वी पश्चात् च वृद्धि-मती दिनस्य पूर्व-अर्ध-पर-अर्ध-भिन्ना छाया इव खल-सज्जनानाम् मैत्री (भवति)।
Summary
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The friendship of the wicked is like the morning shadow, long at first but decreasing. The friendship of the virtuous is like the afternoon shadow, small at first but steadily growing.
सारांश
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दुष्टों की मित्रता दिन के पूर्वार्ध की छाया (आरंभ में बड़ी, फिर छोटी) और सज्जनों की मित्रता उत्तरार्ध की छाया (पहले छोटी, फिर बड़ी) के समान होती है।
पदच्छेदः
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| आरम्भ-गुर्वी | आरम्भ–गुरु (१.१) | great at the beginning |
| क्षयिणी | क्षयिन् (१.१) | diminishing |
| क्रमेण | क्रम (३.१) | gradually |
| लघ्वी | लघु (१.१) | small |
| पुरा | पुरा | at first |
| वृद्धिमती | वृद्धिमत् (१.१) | increasing |
| च | च | and |
| पश्चात् | पश्चात् | afterwards |
| दिनस्य | दिन (६.१) | of the day |
| पूर्वार्ध-परार्ध-भिन्ना | पूर्वार्ध–परार्ध–भिन्न (१.१) | divided into first and second halves |
| छाया | छाया (१.१) | shadow |
| इव | इव | like |
| मैत्री | मैत्री (१.१) | friendship |
| खल-सज्जनानाम् | खल–सज्जन (६.३) | of wicked and good people |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | र | म्भ | गु | र्वी | क्ष | यि | णी | क्र | मे | ण |
| ल | घ्वी | पु | रा | वृ | द्धि | म | ती | च | प | श्चात् |
| दि | न | स्य | पू | र्वा | र्ध | प | रा | र्ध | भि | न्ना |
| छा | ये | व | मै | त्री | ख | ल | स | ज्ज | ना | नाम् |
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