अन्वयः
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कृत्रिमम् वैरम् कृत्रिमैः गुणैः द्राक् नाशम् अभ्येति। प्राण-दानम् विना सहजम् वैरम् क्षयम् न याति।
Summary
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Artificial enmity is quickly destroyed by artificial means, but natural enmity never ends except through the sacrifice of life.
सारांश
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कृत्रिम कारणों से उत्पन्न वैर गुणों से शांत हो सकता है, परंतु जन्मजात शत्रुता प्राणों के त्याग के बिना समाप्त नहीं होती।
पदच्छेदः
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| कृत्रिमम् | कृत्रिम (१.१) | artificial |
| नाशम् | नाश (२.१) | destruction |
| अभ्येति | अभ्येति (अभि√इ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | attains |
| वैरम् | वैर (१.१) | enmity |
| द्राक् | द्राक् | quickly |
| कृत्रिमैः | कृत्रिम (३.३) | artificial |
| गुणैः | गुण (३.३) | by qualities |
| प्राण-दानम् | प्राण–दान (२.१) | sacrifice of life |
| विना | विना | without |
| वैरम् | वैर (१.१) | enmity |
| सहजम् | सहज (१.१) | natural |
| याति | याति (√या कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | goes, attains |
| न | न | not |
| क्षयम् | क्षय (२.१) | diminution, destruction |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कृ | त्रि | मं | ना | श | म | भ्ये | ति |
| वै | रं | द्रा | क्कृ | त्रि | मै | र्गु | णैः |
| प्रा | ण | दा | नं | वि | ना | वै | रं |
| स | ह | जं | या | ति | न | क्ष | यम् |
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