अन्वयः
AI
भवादृशैः वियोगः न, प्राण-परित्यागः वरम्। प्राणाः जन्मान्तरे भूयः भवन्ति, भवद्-विधाः न भवन्ति।
Summary
AI
Giving up one's life is better than separation from those like you. Life returns again in another birth, but friends like you do not.
सारांश
AI
आप जैसे मित्रों के वियोग से अच्छा प्राण त्यागना है, क्योंकि प्राण पुनः मिल सकते हैं पर आप जैसे मित्र नहीं।
पदच्छेदः
AI
| वरम् | वर | better |
| प्राण-परित्यागः | प्राण–परित्याग (१.१) | abandonment of life |
| न | न | not |
| वियोगः | वियोग (१.१) | separation |
| भवादृशैः | भवत्–दृश् (३.३) | from those like you |
| प्राणाः | प्राण (१.३) | lives |
| जन्मान्तरे | जन्मन्–अन्तर (७.१) | in another birth |
| भूयः | भूयस् | again |
| न | न | not |
| भवन्ति | भवन्ति (√भू कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | become/are |
| भवद्-विधाः | भवत्–विध (१.३) | those like you |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| व | रं | प्रा | ण | प | रि | त्या | गो |
| न | वि | यो | गो | भ | वा | दृ | शैः |
| प्रा | णा | ज | न्मा | न्त | रे | भू | यो |
| न | भ | व | न्ति | भ | व | द्वि | धाः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.