अन्वयः
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अज्ञानात् वा अपि ज्ञानतः मया यत् दुरुक्तम् उदाहृतम्, तत् अद्य द्वाभ्याम् अपि प्रसादतः क्षम्यताम्।
Summary
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Whatever harsh or wrong words I have spoken, whether out of ignorance or knowingly, may both of you please forgive those today out of grace.
सारांश
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अज्ञानवश या जानकर मैंने जो भी अनुचित शब्द कहे हों, आप दोनों कृपा करके मुझे उनके लिए क्षमा करें।
पदच्छेदः
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| अज्ञानात् | अज्ञान (५.१) | from ignorance |
| ज्ञानतः | ज्ञान (५.१) | knowingly |
| वा | वा | or |
| अपि | अपि | even |
| दुरुक्तं | दुर्–उक्त (√वच्+क्त, १.१) | misspoken |
| यत् | यद् (१.१) | which |
| उदाहृतम् | उदाहृत (उत्+आ√हृ+क्त, १.१) | uttered |
| मया | अहम् (३.१) | by me |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| क्षम्यताम् | क्षम्यताम् (√क्षम् भावकर्मणोः लोट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | may be forgiven |
| अद्य | अद्य | today |
| द्वाभ्याम् | द्वि (३.२) | by both |
| अपि | अपि | even |
| प्रसादतः | प्रसाद (५.१) | by grace/favor |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | ज्ञा | ना | ज्ज्ञा | न | तो | वा | पि |
| दु | रु | क्तं | य | दु | दा | हृ | तम् |
| म | या | त | त्क्ष | म्य | ता | म | द्य |
| द्वा | भ्या | म | पि | प्र | सा | द | तः |
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