अन्वयः
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यदि प्राण-अत्यये समुत्पन्ने मित्र-दर्शनं स्यात्, तत् पश्चात् जीवतः अपि मृतस्य च द्वाभ्यां सुख-दम्।
Summary
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If the sight of a friend occurs when life is departing, it brings happiness to both: to the one who survives and to the one who passes away.
सारांश
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प्राण संकट के समय मित्र का दर्शन जीवित और मृत दोनों ही स्थितियों में अत्यंत सुखदायी होता है।
पदच्छेदः
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| प्राणात्यये | प्राण–अत्यय (७.१) | when life is at an end |
| समुत्पन्ने | समुत्पन्न (सम्+उत्√पद्+क्त, ७.१) | arisen/occurred |
| यदि | यदि | if |
| स्यात् | स्यात् (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | may be |
| मित्र-दर्शनं | मित्र–दर्शन (१.१) | sight of a friend |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| द्वाभ्यां | द्वि (४.२) | for both |
| सुख-दं | सुख–द (√दा+क, १.१) | happiness-giving |
| पश्चात् | पश्चात् | afterwards |
| जीवतोऽपि | जीवत् (६.१) | even of the living one |
| मृतस्य | मृत (६.१) | of the dead one |
| च | च | and |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्रा | णा | त्य | ये | स | मु | त्प | न्ने |
| य | दि | स्या | न्मि | त्र | द | र्श | नं |
| त | द्द्वा | भ्यां | सु | ख | दं | प | श्चा |
| ज्जी | व | तो | ऽपि | मृ | त | स्य | च |
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