अन्वयः
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यः सुभाषित-मय-द्रव्य-सङ्ग्रहं न करोति, सः तु प्रस्ताव-यज्ञेषु कां दक्षिणाम् प्रदास्यति?
Summary
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What sacrificial fee will he offer in the sacrifices of discourse who does not accumulate the wealth consisting of eloquent sayings (subhāṣita)?
सारांश
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जो व्यक्ति सुंदर वचनों का संग्रह नहीं करता, वह सभा रूपी यज्ञ के अवसरों पर ज्ञान की क्या दक्षिणा देगा?
पदच्छेदः
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| सुभाषित-मय-द्रव्य-सङ्ग्रहं | सुभाषित–मय–द्रव्य–सङ्ग्रह (२.१) | collection of wealth consisting of good sayings |
| न | न | not |
| करोति | करोति (√कृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | does |
| यः | यद् (१.१) | who |
| सः | तद् (१.१) | he |
| तु | तु | indeed |
| प्रस्ताव-यज्ञेषु | प्रस्ताव–यज्ञ (७.३) | in the sacrifices of occasions (discussions) |
| कां | किम् (२.१) | what |
| प्रदास्यति | प्रदास्यति (प्र√दा कर्तरि लृट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | will give |
| दक्षिणाम् | दक्षिणा (२.१) | offering/fee |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सु | भा | षि | त | म | य | द्र | व्य |
| स | ङ्ग्र | हं | न | क | रो | ति | यः |
| स | तु | प्र | स्ता | व | य | ज्ञे | षु |
| कां | प्र | दा | स्य | ति | द | क्षि | णाम् |
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