तावत्स्यात्सर्वकृत्येषु पुरुषोऽत्र स्वयं प्रभुः ।
स्त्रीवाक्याङ्कुशविक्षुण्णो यावन्नो ध्रियते बलात् ॥
तावत्स्यात्सर्वकृत्येषु पुरुषोऽत्र स्वयं प्रभुः ।
स्त्रीवाक्याङ्कुशविक्षुण्णो यावन्नो ध्रियते बलात् ॥
स्त्रीवाक्याङ्कुशविक्षुण्णो यावन्नो ध्रियते बलात् ॥
अन्वयः
AI
अत्र पुरुषः तावत् सर्व-कृत्येषु स्वयं प्रभुः स्यात् यावत् स्त्री-वाक्य-अङ्कुश-विक्षुण्णः बलात् न ध्रियते ।
Summary
AI
In this world, a man remains master of all his actions only as long as he is not forcibly captured and wounded by the goad of a woman's words.
सारांश
AI
पुरुष अपने कार्यों में तभी तक स्वतंत्र स्वामी रहता है, जब तक वह स्त्री के वचनों रूपी अंकुश द्वारा वश में नहीं कर लिया जाता।
पदच्छेदः
AI
| तावत् | तावत् | so long |
| स्यात् | स्यात् (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | may be |
| सर्व-कृत्येषु | सर्व–कृत्य (७.३) | in all affairs |
| पुरुषः | पुरुष (१.१) | a man |
| अत्र | अत्र | here |
| स्वयम् | स्वयम् | himself |
| प्रभुः | प्रभु (१.१) | master |
| स्त्री-वाक्याङ्कुश-विक्षुण्णः | स्त्री–वाक्य–अङ्कुश–विक्षुण्ण (वि√विक्षुण्ण+क्त, १.१) | pierced by the goad of a woman's words |
| यावत् | यावत् | as long as |
| न | न | not |
| ध्रियते | ध्रियते (√धृ भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is held/controlled |
| बलात् | बल (५.१) | forcibly |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ता | व | त्स्या | त्स | र्व | कृ | त्ये | षु |
| पु | रु | षो | ऽत्र | स्व | यं | प्र | भुः |
| स्त्री | वा | क्या | ङ्कु | श | वि | क्षु | ण्णो |
| या | व | न्नो | ध्रि | य | ते | ब | लात् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.