अन्वयः
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यः मन्द-धीः जनः स्तोकेन अपि सन्तोषम् कुरुते तस्य भाग्य-विहीनस्य दत्ता श्रीः अपि मार्ज्यते ।
Summary
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A foolish person who remains satisfied with very little has even his bestowed fortune wiped away, for he is destitute of luck.
सारांश
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जो मंदबुद्धि व्यक्ति थोड़े में ही संतोष कर लेता है, उस भाग्यहीन को प्राप्त हुई लक्ष्मी भी उससे दूर चली जाती है।
पदच्छेदः
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| यः | यद् (१.१) | undefined |
| स्तोकेन | स्तोक (३.१) | undefined |
| अपि | अपि | undefined |
| सन्तोषं | सन्तोष (२.१) | undefined |
| कुरुते | कुरुते (√कृ कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | undefined |
| मन्दधीः | मन्दधी (१.१) | undefined |
| जनः | जन (१.१) | undefined |
| तस्य | तत् (६.१) | undefined |
| भाग्य-विहीनस्य | भाग्य–विहीन (६.१) | undefined |
| दत्ता | दत्त (√दा+क्त, १.१) | undefined |
| श्रीः | श्री (१.१) | undefined |
| अपि | अपि | undefined |
| मार्ज्यते | मार्ज्यते (√मृज् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | undefined |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| यः | स्तो | के | ना | पि | स | न्तो | षं |
| कु | रु | ते | म | न्द | धी | र्ज | नः |
| त | स्य | भा | ग्य | वि | ही | न | स्य |
| द | त्ता | श्री | र | पि | मा | र्ज्य | ते |
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