अन्वयः
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यथा एकेन हस्तेन तालिका न संप्रपद्यते, तथा उद्यम-परित्यक्तं कर्मणः फलं न स्मृतम् ।
Summary
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Just as a clap cannot be produced with only one hand, the fruit of an action is not realized when effort is abandoned.
सारांश
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जैसे एक हाथ से ताली नहीं बजती, वैसे ही पुरुषार्थ या उद्यम के बिना केवल भाग्य से कर्म का फल प्राप्त नहीं होता।
पदच्छेदः
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| यथा | यथा | just as |
| एकेन | एक (३.१) | with one |
| न | न | not |
| हस्तेन | हस्त (३.१) | hand |
| तालिका | तालिका (१.१) | a clap |
| संप्रपद्यते | संप्रपद्यते (सम्+प्र√पद् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is produced |
| तथा | तथा | similarly |
| उद्यम-परित्यक्तम् | उद्यम–परित्यक्त (१.१) | abandoned by effort |
| न | न | not |
| फलम् | फल (१.१) | fruit |
| कर्मणः | कर्मन् (६.१) | of action |
| स्मृतम् | स्मृत (√स्मृ+क्त, १.१) | is considered |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | थै | के | न | न | ह | स्ते | न |
| ता | लि | का | सं | प्र | प | द्य | ते |
| त | थो | द्य | म | प | रि | त्य | क्तं |
| न | फ | लं | क | र्म | णः | स्मृ | तम् |
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