अन्वयः
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यथा छाया-तपौ नित्यं परस्परं सुसम्बद्धौ, एवम् इतरेतरं कर्म च कर्ता च संश्लिष्टौ ।
Summary
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Just as shadow and sunlight are always closely connected to each other, so are the action and the doer fundamentally inseparable.
सारांश
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जैसे छाया और धूप परस्पर सदैव जुड़े रहते हैं, वैसे ही कर्म और कर्ता भी एक-दूसरे से अभिन्न रूप से संबद्ध होते हैं।
पदच्छेदः
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| यथा | यथा | just as |
| छाया-तपौ | छाया–तपस् (१.२) | shadow and sunlight |
| नित्यम् | नित्य | always |
| सुसम्बद्धौ | सुसम्बद्ध (१.२) | well-connected |
| परस्परम् | परस्पर | to each other |
| एवम् | एवम् | similarly |
| कर्म | कर्मन् (१.१) | action |
| च | च | and |
| कर्ता | कर्तृ (१.१) | the doer |
| च | च | and |
| संश्लिष्टौ | संश्लिष्ट (१.२) | intertwined |
| इतरेतरम् | इतरेतर | with each other |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | था | छा | या | त | पौ | नि | त्यं |
| सु | स | म्ब | द्धौ | प | र | स्प | रं |
| ए | वं | क | र्म | च | क | र्ता | च |
| सं | श्लि | ष्टा | वि | त | रे | त | रम् |
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