अन्वयः
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पक्षिणां यत् आकाशे उत्पतन्ति, मही-तले निपतन्ति, तत् अपि प्राप्त्या भवति, अदत्तं न उपतिष्ठति ।
Summary
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The flight of birds in the sky or their descent to the earth happens by destiny; that which is not destined to be given never comes to pass.
सारांश
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पक्षी आकाश में उड़ें या धरती पर गिरें, उन्हें वही प्राप्त होता है जो भाग्य में है; जो प्रारब्ध में नहीं है, वह कभी प्राप्त नहीं होता।
पदच्छेदः
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| उत्पतन्ति | उत्पतन्ति (उद्√पत् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | fly up |
| यत् | यत् | that which |
| आकाशे | आकाश (७.१) | in the sky |
| निपतन्ति | निपतन्ति (नि√पत् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | fall down |
| महीतले | महीतल (७.१) | on the ground |
| पक्षिणाम् | पक्षिन् (६.३) | of birds |
| तत् | तत् | that |
| अपि | अपि | even |
| प्राप्त्या | प्राप्ति (३.१) | by attainment |
| न | न | not |
| अदत्तम् | अदत्त (१.१) | that which is not given |
| उपतिष्ठति | उपतिष्ठति (उप√स्था कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | comes near |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उ | त्प | त | न्ति | य | दा | का | शे |
| नि | प | त | न्ति | म | ही | त | ले |
| प | क्षि | णां | त | द | पि | प्रा | प्त्या |
| ना | द | त्त | मु | प | ति | ष्ठ | ति |
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