अन्वयः
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सर्वेषाम् एव मर्त्यानां व्यसने समुपस्थिते मित्रात् अन्यः वाक्-मात्रेण अपि साहाय्यं न सन्दधे ।
Summary
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For all mortals, when calamity strikes, no one other than a friend offers help, even if only through words of comfort.
सारांश
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सभी मनुष्यों के लिए संकट के समय मित्र के अतिरिक्त अन्य कोई केवल वाणी से भी सहायता देने का साहस नहीं करता।
पदच्छेदः
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| सर्वेषाम् | सर्व (६.३) | of all |
| एव | एव | indeed |
| मर्त्यानां | मर्त्य (६.३) | of mortals |
| व्यसने | व्यसन (७.१) | in distress |
| समुपस्थिते | समुपस्थित (७.१) | having arrived |
| वाङ्-मात्रेण | वाक्–मात्र (३.१) | by mere words |
| अपि | अपि | even |
| साहाय्यं | साहाय्य (२.१) | help |
| मित्रात् | मित्र (५.१) | from a friend |
| अन्यः | अन्य (१.१) | another |
| न | न | not |
| सन्दधे | सन्दधे (सम्√धा कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | provides |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | र्वे | षा | मे | व | म | र्त्या | नां |
| व्य | स | ने | स | मु | प | स्थि | ते |
| वा | ङ्मा | त्रे | णा | पि | सा | हा | य्यं |
| मि | त्रा | द | न्यो | न | स | न्द | धे |
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