Loading data... On slow networks this could take a few minutes.
100%

सुसञ्चितैर्जीवनवत्सुरक्षितै-
र्निजेऽपि देहे न वियोजितैः क्वचित् ।
पुंसो यमान्तं व्रजतोऽपि निष्ठुरैर्
एतैर्धनैः पञ्चपदी न दीयते ॥

अन्वयः AI सु-सञ्चितैः जीवन-वत् सु-रक्षितैः निजे देहे अपि क्वचित् न वियोजितैः एतैः निष्ठुरैः धनैः यम-अन्तं व्रजतः अपि पुंसः पञ्च-पदी न दीयते ।
Summary AI Even if wealth is well-accumulated, protected like life itself, and never separated from one's own body, these cruel riches do not accompany a man for even five steps as he goes to the realm of Yama.
सारांश AI प्राणों की तरह सुरक्षित और संचित किया गया धन, जिसे अपने शरीर पर भी खर्च नहीं किया गया, मृत्यु के बाद यमलोक जाते समय पाँच कदम भी साथ नहीं देता।
पदच्छेदः AI
सुसञ्चितैःसुसञ्चित (३.३) well-accumulated
जीवनवत्जीवन like life
सुरक्षितैःसुरक्षित (३.३) well-protected
निजेनिज (७.१) in one's own
अपिअपि even
देहेदेह (७.१) body
not
वियोजितैःवियोजित (वि√युज्+णिच्+क्त) separated
क्वचित्क्वचित् anywhere
पुंसःपुंस् (६.१) of a person
यमान्तम्यमअन्त (२.१) the end of Yama (death)
व्रजतःव्रजत् (√व्रज्+शतृ) going
निष्ठुरैःनिष्ठुर (३.३) by cruel (ones)
एतैःएतद् (३.३) by these
धनैःधन (३.३) by riches
पञ्चपदीपञ्चपदी (१.१) five steps (a short distance)
दीयतेदीयते (√दा भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) is given
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२
सु ञ्चि तै र्जी त्सु क्षि तै
र्नि जे ऽपि दे हे वि यो जि तैः क्व चित्
पुं सो मा न्तं व्र तो ऽपि नि ष्ठु रै
रे तै र्ध नैः ञ्च दी दी ते
About

Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.