मित्रं कोऽपि न कस्यापि नितान्तं न च वैरकृत् ।
दृश्यते मित्रविध्वस्तात्कार्याद्वैरी परीक्षितः ॥

अन्वयः AI कः अपि कस्य अपि नितान्तं मित्रं न च न वैर-कृत् मित्र-विध्वस्तात् कार्यात् वैरी परीक्षितः दृश्यते ।
Summary AI No one is anyone's absolute friend nor absolute enemy; an enemy is tested and identified through actions that destroy friendship.
सारांश AI संसार में न कोई किसी का स्थाई मित्र है न शत्रु; कार्यों की सिद्धि या विनाश के आधार पर ही मित्र और शत्रु की पहचान होती है।
पदच्छेदः AI
मित्रम्मित्र (२.१) friend
कःकिम् (१.१) who
अपिअपि even
not
कस्यकिम् (६.१) of whom
नितान्तम्नितान्त absolutely
and
वैरकृत्वैरकृत् (१.१) foe
दृश्यतेदृश्यते (√दृश् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) is seen
मित्रविध्वस्तात्मित्रविध्वस्त (५.१) from the destruction of a friend
कार्यात्कार्य (५.१) from the action
वैरीवैरिन् (१.१) enemy
परीक्षितःपरीक्षित (परि√परीक्ष्+क्त) tested
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
मि त्रं को ऽपि स्या पि
नि ता न्तं वै कृत्
दृ श्य ते मि त्र वि ध्व स्ता
त्का र्या द्वै री री क्षि तः
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