अन्वयः
AI
यः तु क्षुधा निद्रया न कदाचन पीड्यते च शीत-आतप-आद्यैः न सः भृत्यः मही-भुजाम् अर्हः ॥
Summary
AI
One who is never troubled by hunger or sleep, nor by the extremes of cold, heat, and other such hardships, is fit to serve kings.
सारांश
AI
जो न भूख से विचलित होता है, न नींद से, और न ही सर्दी-गर्मी आदि कष्टों से घबराता है, वही राजा के योग्य सेवक है।
पदच्छेदः
AI
| न | न | not |
| क्षुधा | क्षुधा (३.१) | by hunger |
| पीड्यते | पीड्यते (√पीड् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is afflicted |
| यः | यद् (१.१) | who |
| तु | तु | but |
| निद्रया | निद्रा (३.१) | by sleep |
| न | न | not |
| कदाचन | कदाचन | ever |
| न | न | not |
| च | च | and |
| शीतातपाद्यैः | शीत–आतप–आदि (३.३) | by cold, heat, etc. |
| च | च | and |
| सः | तद् (१.१) | he |
| भृत्यः | भृत्य (१.१) | servant |
| अर्हः | अर्ह (१.१) | worthy |
| महीभुजाम् | महीभुज् (६.३) | of kings |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | क्षु | धा | पी | ड्य | ते | य | स्तु |
| नि | द्र | या | न | क | दा | च | न |
| न | च | शी | ता | त | पा | द्यै | श्च |
| स | भृ | त्यो | ऽर्हो | म | ही | भु | जाम् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.