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न गर्वं कुरुते माने नापमाने च तप्यते ।
स्वाकारं रक्षयेद्यस्तु स भृत्योऽर्हो महीभुजाम् ॥

अन्वयः AI यः माने गर्वम् न कुरुते अपमाने च न तप्यते यः तु स्व-आकारम् रक्षयेत् सः भृत्यः मही-भुजाम् अर्हः ॥
Summary AI One who does not become proud when honored, is not pained by dishonor, and preserves his character and composure is fit to serve kings.
सारांश AI जो मान मिलने पर गर्व नहीं करता और अपमान होने पर दुखी नहीं होता तथा अपने धैर्य को बनाए रखता है, वही राजा के योग्य सेवक है।
पदच्छेदः AI
not
गर्वम्गर्व (२.१) pride
कुरुतेकुरुते (√कृ कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) does
मानेमान (७.१) in honor
not
अपमानेअपमान (७.१) in dishonor
and
तप्यतेतप्यते (√तप् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) is distressed
स्वाकारम्स्वआकार (२.१) one's own dignity
रक्षयेत्रक्षयेत् (√रक्ष् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) should protect
यःयद् (१.१) who
तुतु but
सःतद् (१.१) he
भृत्यःभृत्य (१.१) servant
अर्हःअर्ह (१.१) worthy
महीभुजाम्महीभुज् (६.३) of kings
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
र्वं कु रु ते मा ने
ना मा ने प्य ते
स्वा का रं क्ष ये द्य स्तु
भृ त्यो ऽर्हो ही भु जाम्
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