अन्वयः
AI
मही-भुजा ताडितः अपि दुरुक्तः अपि दण्डितः अपि यः पापम् न चिन्तयते सः भृत्यः मही-भुजाम् अर्हः ॥
Summary
AI
One who does not harbor any evil thoughts or ill-will even when struck, insulted, or punished by the king is fit to serve kings.
सारांश
AI
राजा द्वारा दंडित होने या अपशब्द सुनने पर भी जो मन में राजा के प्रति बुरा विचार नहीं लाता, वही राजा के योग्य सेवक है।
पदच्छेदः
AI
| ताडितः | ताडित (√ताड्+क्त, १.१) | struck |
| अपि | अपि | even |
| दुरुक्तः | दुर्–उक्त (१.१) | ill-spoken to |
| अपि | अपि | even |
| दण्डितः | दण्डित (√दण्ड्+क्त, १.१) | punished |
| अपि | अपि | even |
| महीभुजा | महीभुज् (३.१) | by the king |
| यः | यद् (१.१) | who |
| न | न | not |
| चिन्तयते | चिन्तयते (√चिन्त् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | thinks |
| पापम् | पाप (२.१) | evil |
| सः | तद् (१.१) | he |
| भृत्यः | भृत्य (१.१) | servant |
| अर्हः | अर्ह (१.१) | worthy |
| महीभुजाम् | महीभुज् (६.३) | of kings |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ता | डि | तो | ऽपि | दु | रु | क्तो | ऽपि |
| द | ण्डि | तो | ऽपि | म | ही | भु | जा |
| यो | न | चि | न्त | य | ते | पा | पं |
| स | भृ | त्यो | ऽर्हो | म | ही | भु | जाम् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.