अन्वयः
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यस्मिन् निर्विशङ्केन चेतसा कृत्यम् समावेश्य आस्यते सः सेवकः स्यात् च अपरम् कलत्रम् इव ॥
Summary
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A servant to whom a task is entrusted with a completely unsuspicious and trusting heart is like a second spouse (kalatra) to the master.
सारांश
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जिस पर कार्य का भार सौंपकर राजा निश्चिंत मन से बैठ सके, वह सेवक पत्नी के समान विश्वसनीय होता है।
पदच्छेदः
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| यस्मिन् | यद् (७.१) | in whom |
| कृत्यम् | कृत्य (२.१) | task |
| समावेश्य | समावेश्य (सम्+आ√विश्+ल्यप्) | having entrusted |
| निर्विशङ्केन | निर्–विशङ्क (३.१) | without doubt |
| चेतसा | चेतस् (३.१) | by mind |
| आस्यते | आस्यते (√आस् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | one can rest |
| सेवकः | सेवक (१.१) | servant |
| सः | तद् (१.१) | he |
| स्यात् | स्यात् (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | should be |
| कलत्रम् | कलत्र (१.१) | wife |
| इव | इव | like |
| च | च | and |
| अपरम् | अपर (१.१) | another |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | स्मि | न्कृ | त्यं | स | मा | वे | श्य |
| नि | र्वि | श | ङ्के | न | चे | त | सा |
| आ | स्य | ते | से | व | कः | स | स्या |
| त्क | ल | त्र | मि | व | चा | प | रम् |
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