अन्वयः
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यत्र लोहित-आख्यस्य मणेः च पद्म-रागस्य च अन्तरम् न अस्ति । तत्र रत्न-विक्रयः कथम् क्रियते ॥
Summary
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How can a trade of precious stones be conducted in a place where no distinction is made between a common red stone and a valuable padmarāga ruby?
सारांश
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जहाँ लाल मणि और पद्मराग मणि के बीच का अंतर न पता हो, वहाँ रत्नों का व्यापार करना संभव नहीं है।
पदच्छेदः
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| लोहिताख्यस्य | लोहिताख्य (६.१) | of the one named Lohit |
| च | च | and |
| मणेः | मणि (६.१) | of a gem |
| पद्मरागस्य | पद्मराग (६.१) | of a ruby |
| च | च | and |
| अन्तरम् | अन्तर (१.१) | difference |
| यत्र | यत्र | where |
| न | न | not |
| अस्ति | अस्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is |
| कथं | कथम् | how |
| तत्र | तत्र | there |
| क्रियते | क्रियते (√कृ भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is done |
| रत्न-विक्रयः | रत्न–विक्रय (१.१) | sale of gems |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| लो | हि | ता | ख्य | स्य | च | म | णेः |
| प | द्म | रा | ग | स्य | चा | न्त | रम् |
| य | त्र | ना | स्ति | क | थं | त | त्र |
| क्रि | य | ते | र | त्न | वि | क्र | यः |
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