परीक्षका यत्र न सन्ति देशे
नार्घन्ति रत्नानि समुद्रजानि ।
आभीरदेशे किल चन्द्रकान्तं
त्रिभिर्वराटैर्विपणन्ति गोपाः ॥

अन्वयः AI यत्र देशे परीक्षकाः न सन्ति समुद्र-जानि रत्नानि न अर्घन्ति । आभीर-देशे गोपाः चन्द्र-कान्तम् त्रिभिः वराटैः किल विपणन्ति ॥
Summary AI In a land where there are no experts to evaluate them, precious jewels born from the ocean have no value. Indeed, in the land of cowherds, the candrakānta gem is traded for a mere three cowrie shells.
सारांश AI जिस देश में रत्नों के पारखी नहीं होते, वहाँ समुद्र से निकले रत्नों का मूल्य नहीं होता; जैसे अहीरों के देश में ग्वाले चंद्रकांत मणि को तीन कौड़ियों में बेच देते हैं।
पदच्छेदः AI
परीक्षकाःपरीक्षक (१.३) evaluators, experts
यत्रयत्र where
not
सन्तिसन्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) are
देशेदेश (७.१) in a country/place
not
अर्घन्तिअर्घन्ति (√अर्घ् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) are valued
रत्नानिरत्न (१.३) gems
समुद्रजानिसमुद्रज (१.३) born from the ocean
आभीर-देशेआभीरदेश (७.१) in the country of Abhiras
किलकिल indeed, it is said
चन्द्रकान्तंचन्द्रकान्त (२.१) moonstone
त्रिभिःत्रि (३.३) by three
वराटैःवराट (३.३) cowries
विपणन्तिविपणन्ति (वि√पण् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) sell
गोपाःगोप (१.३) cowherds
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
री क्ष का त्र न्ति दे शे
ना र्घ न्ति त्ना नि मु द्र जा नि
भी दे शे कि न्द्र का न्तं
त्रि भि र्व रा टै र्वि न्ति गो पाः
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