अन्वयः
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येषाम् बुद्धिः काचे मणिः मणौ च काचः इति विकल्पते । तेषाम् सन्निधौ नाम-मात्रः अपि भृत्यः न तिष्ठति ॥
Summary
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A servant, even in name only, does not stay in the presence of those whose intellect confuses glass for gems and gems for glass.
सारांश
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जिनकी बुद्धि काँच को मणि और मणि को काँच समझने की भूल करती है, उनके पास कोई भी स्वाभिमानी सेवक नाम मात्र के लिए भी नहीं रुकता।
पदच्छेदः
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| काचे | काच (७.१) | in glass |
| मणिः | मणि (१.१) | a gem |
| मणौ | मणि (७.१) | in a gem |
| काचः | काच (१.१) | glass |
| येषां | यद् (६.३) | whose |
| बुद्धिः | बुद्धि (१.१) | intellect |
| विकल्पते | विकल्पते (वि√कल्प् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | wavers, mistakes |
| न | न | not |
| तेषां | तद् (६.३) | their |
| सन्निधौ | सन्निधि (७.१) | in the presence |
| भृत्यः | भृत्य (१.१) | servant |
| नाम-मात्रः | नाम–मात्र (१.१) | merely by name, nominal |
| अपि | अपि | even |
| तिष्ठति | तिष्ठति (√स्था कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | stays, remains |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| का | चे | म | णि | र्म | णौ | का | चो |
| ये | षां | बु | द्धि | र्वि | क | ल्प | ते |
| न | ते | षां | स | न्नि | धौ | भृ | त्यो |
| ना | म | मा | त्रो | ऽपि | ति | ष्ठ | ति |
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