असमैः समीयमानः समैश्च परिहीयमाणसत्कारः ।
धुरि यो न युज्यमानस्त्रिभिर् अर्थपतिं त्यजति भृत्यः ॥

अन्वयः AI यः भृत्यः असमैः समीयमानः, समैः च परिहीयमान-सत्कारः, धुरि न युज्यमानः, त्रिभिः अर्थ-पतिं त्यजति ।
Summary AI A servant deserts his master for three reasons: being treated as equal to the inferior, having his respect diminished among equals, and not being appointed to a lead position.
सारांश AI यदि सेवक की तुलना अयोग्यों से हो, बराबर वालों के बीच सम्मान घटे या उसे महत्वपूर्ण कार्य न मिले, तो वह स्वामी को छोड़ देता है कानून।
पदच्छेदः AI
असमैःअसम (३.३) by inferiors
समीयमानःसमीयमान (सम्√इ+शानच्, १.१) being treated as equal
समैःसम (३.३) by equals
and
परिहीयमाण-सत्-कारःपरिहीयमाण (परि√हा+शानच्)–सत्-कार (१.१) whose respect is diminished
धुरिधुर (७.१) in a position
यःयद् (१.१) who
not
युज्यमानःयुज्यमान (√युज्+शानच्, १.१) being employed
त्रिभिःत्रि (३.३) by three
अर्थ-पतिम्अर्थपति (२.१) the master
त्यजतित्यजति (√त्यज् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) abandons
भृत्यःभृत्य (१.१) a servant
छन्दः आर्या []
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२
मैः मी मा नः
मै श्च रि ही मा त्का रः
धु रि यो यु ज्य मा
स्त्रि भि र्थ तिं त्य ति भृ त्यः
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