दन्तस्य निष्कोषणकेन नित्यं
कर्णस्य कण्डूयनकेन वापि ।
तृणेन कार्यं भवतीश्वराणां
किमाङ्ग वाग्घस्तवता नरेण ॥

अन्वयः AI ईश्वराणां दन्तस्य निष्कोषणकेन वा अपि कर्णस्य कण्डूयनकेन तृणेन नित्यं कार्यं भवति, अङ्ग वाक्-हस्त-वता नरेण किम् ।
Summary AI If masters always have a use for a mere blade of grass to pick teeth or scratch an ear, how much more then for a human being endowed with speech and hands?
सारांश AI जब राजाओं के लिए दाँत कुरेदने के तिनके या कान खुजलाने वाली लकड़ी जैसी तुच्छ वस्तुएँ भी उपयोगी होती हैं, तो फिर हाथ और वाणी वाले मनुष्य की महत्ता तो और भी अधिक है।
पदच्छेदः AI
दन्तस्यदन्त (६.१) of a tooth
निष्कोषणकेननिष्कोषणक (३.१) by a toothpick
नित्यम्नित्य always
कर्णस्यकर्ण (६.१) of an ear
कण्डूयनकेनकण्डूयनक (३.१) by an ear-scratcher
वावा or
अपिअपि even
तृणेनतृण (३.१) by a blade of grass
कार्यम्कार्य (१.१) work
भवतिभवति (√भू कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) is done
ईश्वराणाम्ईश्वर (६.३) of the powerful
किम्किम् what
आङ्गआङ्ग oh
वाग्घ-स्तवतावाग्घस्त (३.१) by a person whose hand is tied by speech
नरेणनर (३.१) by a person
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
न्त स्य नि ष्को के नि त्यं
र्ण स्य ण्डू के वा पि
तृ णे का र्यं ती श्व रा णां
कि मा ङ्ग वा ग्घ स्त ता रे
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