अन्वयः
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भर्तुः चित्त-अनुवर्तित्वं अनुजीविनाम् सु-वृत्तं, नित्यं छन्द-अनुवर्तिभिः राक्षसाः च अपि गृह्यन्ते ।
Summary
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Following the mind of the master is the good conduct of dependents; even demons are brought under control by those who constantly act according to their desires.
सारांश
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स्वामी की इच्छा के अनुसार चलना ही सेवकों का उत्तम आचरण है; निरंतर इच्छाओं का अनुसरण करने वालों द्वारा तो राक्षस भी वश में कर लिए जाते हैं।
पदच्छेदः
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| भर्तुः | भर्तृ (६.१) | of the master |
| चित्तानुवर्तित्वम् | चित्त–अनुवर्तित्व (१.१) | following the will |
| सुवृत्तम् | सुवृत्त (१.१) | good conduct |
| च | च | and |
| अनुजीविनाम् | अनुजीविन् (६.३) | of dependents |
| राक्षसाः | राक्षस (१.३) | demons |
| च | च | and |
| अपि | अपि | even |
| गृह्यन्ते | गृह्यन्ते (√ग्रह् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | are captured |
| नित्यम् | नित्य | always |
| छन्दानुवर्तिभिः | छन्द–अनुवर्तिन् (३.३) | by those who follow desires |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भ | र्तु | श्चि | त्ता | नु | व | र्ति | त्वं |
| सु | वृ | त्तं | चा | नु | जी | वि | नाम् |
| रा | क्ष | सा | श्चा | पि | गृ | ह्य | न्ते |
| नि | त्यं | छ | न्दा | नु | व | र्ति | भिः |
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