अन्वयः
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राज्ञां सर्व-लोक-नमस्कृतं पदं दुरारोहं, स्वल्पेन अपि अपकारेण ब्राह्मण्यं इव दुष्यति ।
Summary
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The position of kings, bowed to by the whole world, is difficult to attain; it is defiled by even a small transgression, just like the status of a Brāhmaṇa.
सारांश
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राजाओं का पद अत्यंत ऊँचा और सबके द्वारा पूजनीय होता है; जिस प्रकार ब्राह्मणत्व छोटी सी भूल से दूषित हो जाता है, वैसे ही राजपद भी थोड़े से अपकार से कलंकित हो जाता है।
पदच्छेदः
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| दुरारोहम् | दुरारोह (२.१) | difficult to ascend |
| पदम् | पद (२.१) | position |
| राज्ञाम् | राजन् (६.३) | of kings |
| सर्व-लोक-नमस्कृतम् | सर्व–लोक–नमस्कृत (२.१) | revered by all people |
| स्वल्पेन | स्वल्प (३.१) | by a slight |
| अपि | अपि | even |
| अपकारेण | अपकार (३.१) | offense |
| ब्राह्मण्यमिव | ब्राह्मण्य (१.१)–इव | like Brahmanhood |
| दुष्यति | दुष्यति (√दुष् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | becomes tainted |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दु | रा | रो | हं | प | दं | रा | ज्ञां |
| स | र्व | लो | क | न | म | स्कृ | तम् |
| स्व | ल्पे | ना | प्य | प | का | रे | ण |
| ब्रा | ह्म | ण्य | मि | व | दु | ष्य | ति |
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