अन्वयः
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सु-वृष्टि-गुण-सम्पन्नात् बीजात् अपरं बीजं इव, वदताम् उत्तरात् उत्तरं वाक्यं सम्प्रजायते ।
Summary
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Just as a seed from a plant enriched by good rain produces another seed, so does one word follow another in sequence among those who are speaking.
सारांश
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जिस प्रकार अच्छी वर्षा और गुणों से युक्त बीज से दूसरा बीज उत्पन्न होता है, उसी प्रकार तर्कपूर्ण उत्तर से ही नया संवाद उत्पन्न होता है।
पदच्छेदः
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| उत्तरात् | उत्तर (५.१) | from the next |
| उत्तरम् | उत्तर (२.१) | next |
| वाक्यम् | वाक्य (२.१) | statement |
| वदताम् | वदत् (६.३) | of those speaking |
| सम्प्रजायते | सम्प्रजायते (सम्+प्र√जन् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | arises |
| सुवृष्टि-गुण-सम्पन्नात् | सुवृष्टि–गुण–सम्पन्न (५.१) | from that endowed with the quality of good rain |
| बीजात् | बीज (५.१) | from a seed |
| बीजम् | बीज (२.१) | seed |
| इव | इव | like |
| अपरम् | अपर (२.१) | another |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उ | त्त | रा | दु | त्त | रं | वा | क्यं |
| व | द | तां | स | म्प्र | जा | य | ते |
| सु | वृ | ष्टि | गु | ण | स | म्प | न्ना |
| द्बी | जा | द्बी | ज | मि | वा | प | रम् |
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