अन्वयः
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यः युद्ध-काले अग्रणीः स्यात् पुरे सदा पृष्ठ-अनुगः स्यात् हर्म्ये प्रभोः द्वार-आश्रितः स्यात् सः राज-वल्लभः भवेत्।
Summary
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He who is at the forefront during war, follows behind in the city, and stays at the door of the master's palace becomes a favorite of the king.
सारांश
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जो युद्ध के समय सबसे आगे रहे, नगर में सदा राजा के पीछे चले और महल में द्वार पर उपस्थित रहे, वही राजा का प्रिय सेवक होता है।
पदच्छेदः
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| युद्धकाले | युद्ध–काल (७.१) | undefined |
| अग्रणीः | अग्रणी (१.१) | undefined |
| यः | यद् (१.१) | undefined |
| स्यात् | स्यात् (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | undefined |
| सदा | सदा | undefined |
| पृष्ठानुगः | पृष्ठ–अनुग (१.१) | undefined |
| पुरे | पुर (७.१) | undefined |
| प्रभोः | प्रभु (६.१) | undefined |
| द्वाराश्रितो | द्वार–आश्रित (१.१) | undefined |
| हर्म्ये | हर्म्य (७.१) | undefined |
| स | तद् (१.१) | undefined |
| भवेत् | भवेत् (√भू कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | undefined |
| राजवल्लभः | राज–वल्लभ (१.१) | undefined |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| यु | द्ध | का | ले | ऽग्र | णी | र्यः | स्या |
| त्स | दा | पृ | ष्ठा | नु | गः | पु | रे |
| प्र | भो | र्द्वा | रा | श्रि | तो | ह | र्म्ये |
| स | भ | वे | द्रा | ज | व | ल्ल | भः |
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