अन्वयः
AI
यः यस्य गुणान् न वेत्ति पण्डितः तम् न सेवेत। सुकृष्टात् ऊषरात् इव तस्मात् किञ्चित् फलम् न हि भवति।
Summary
AI
A wise man should not serve one who does not recognize his merits. Just as no fruit comes from well-plowed barren land, no reward comes from such a master.
सारांश
AI
जो व्यक्ति गुणों को नहीं पहचानता, विद्वान को उसकी सेवा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि ऊसर भूमि को जोतने के समान ऐसी सेवा से कोई फल प्राप्त नहीं होता।
पदच्छेदः
AI
| यः | यद् (१.१) | who |
| न | न | not |
| वेत्ति | वेत्ति (√विद् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | knows |
| गुणान् | गुण (२.३) | merits |
| अस्य | इदम् (६.१) | of him |
| न | न | not |
| तम् | तद् (२.१) | him |
| सेवेत | सेवेत (√सेव् कर्तरि विधिलिङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | should serve |
| पण्डितः | पण्डित (१.१) | wise person |
| न | न | not |
| हि | हि | indeed |
| तस्मात् | तद् (५.१) | from him |
| फलम् | फल (१.१) | fruit |
| किञ्चित् | किञ्चित् | anything |
| सुकृष्टात् | सुकृष्ट (सु√कृष्+क्त, ५.१) | from well-plowed |
| ऊषरात् | ऊषर (५.१) | from barren land |
| इव | इव | like |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| यो | न | वे | त्ति | गु | णा | न्य | स्य |
| न | तं | से | वे | त | प | ण्डि | तः |
| न | हि | त | स्मा | त्फ | लं | कि | ञ्चि |
| त्सु | कृ | ष्टा | दू | ष | रा | दि | व |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.