सत्यानृता च परुषा प्रियवादिनी च
हिंस्रा दयालुरपि चार्थपरा वदान्या ।
भूरिव्यथा प्रचुरवित्तसमागमा च
वेश्याङ्गनेव नृपनीतिरनेकरूपा ॥

अन्वयः AI नृप-नीतिः वेश्या-अङ्गना इव अनेक-रूपा सत्या-अनृता च परुषा प्रिय-वादिनी च हिंस्रा दयालुः अपि च अर्थ-परा वदान्या भूरि-व्यथा प्रचुर-वित्त-समागमा च (भवति) ॥
Summary AI Statecraft, like a courtesan, takes many forms: it is both truthful and false, harsh and sweet-spoken, cruel and compassionate, greedy and generous, highly distressing and a source of abundant wealth.
सारांश AI राजनीति वेश्या के समान अनेक रूपों वाली होती है—कभी सत्य तो कभी असत्य, कभी कठोर तो कभी प्रियभाषिणी, कभी हिंसक तो कभी दयालु, कभी लोभी तो कभी दानी और कभी कष्टप्रद तो कभी प्रचुर धन देने वाली।
पदच्छेदः AI
सत्यानृतासत्यअनृत (१.१) true and false
and
परुषापरुष (१.१) harsh
प्रिय-वादिनीप्रियवादिनी (१.१) sweet-speaking
and
हिंस्राहिंस्र (१.१) violent
दयालुःदयालु (१.१) compassionate
अपिअपि also
and
अर्थ-पराअर्थपर (१.१) focused on wealth
वदान्यावदान्य (१.१) generous
भूरि-व्यथाभूरिव्यथा (१.१) causing much pain
प्रचुर-वित्त-समागमाप्रचुरवित्त–समागमा (१.१) bringing much wealth
and
वेश्याङ्गनावेश्याअङ्गना (१.१) courtesan
इवइव like
नृप-नीतिःनृपनीति (१.१) royal policy
अनेक-रूपाअनेकरूप (१.१) many-formed
छन्दः वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३ १४
त्या नृ ता रु षा प्रि वा दि नी
हिं स्रा या लु पि चा र्थ रा दा न्या
भू रि व्य था प्र चु वि त्त मा मा
वे श्या ङ्ग ने नृ नी ति ने रू पा
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