अन्वयः
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कः अपि नरः कस्यचित् भक्त्या प्रियम् न प्रकुरुते, भयम् प्रलोभम् वा कार्य-कारणम् एव वा मुक्त्वा ।
Summary
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No man does a kindness to another out of pure devotion, but rather due to fear, greed, or some specific motive of cause and effect.
सारांश
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भय, प्रलोभन या किसी स्वार्थपूर्ण कारण के बिना कोई भी व्यक्ति केवल भक्ति के वश होकर किसी का भला नहीं करता है।
पदच्छेदः
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| न | न | not |
| भक्त्या | भक्ति (३.१) | out of devotion |
| कस्यचित् | किम् (६.१) | of anyone |
| कोऽपि | किम् (१.१)–अपि | anyone |
| प्रियम् | प्रिय (२.१) | a favor |
| प्रकुरुते | प्रकुरुते (प्र√कृ कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | does |
| नरः | नर (१.१) | person |
| मुक्त्वा | मुक्त्वा (√मुच्+क्त्वा) | except for |
| भयम् | भय (२.१) | fear |
| प्रलोभम् | प्रलोभ (२.१) | temptation |
| वा | वा | or |
| कार्य-कारणम् | कार्य–कारण (२.१) | self-interest |
| एव | एव | only |
| वा | वा | or |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | भ | क्त्या | क | स्य | चि | त्को | ऽपि |
| प्रि | यं | प्र | कु | रु | ते | न | रः |
| मु | क्त्वा | भ | यं | प्र | लो | भं | वा |
| का | र्य | का | र | ण | मे | व | वा |
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