नराधिपा नीचजनानुवर्तिनो
बुधोपदिष्टेन पथा न यान्ति ये ।
विशन्त्यतो दुर्गममार्गनिर्गमं
समस्तसम्बाधमनर्थपञ्जरम् ॥

अन्वयः AI ये नराधिपाः नीच-जन-अनुवर्तिनः बुध-उपदिष्टेन पथा न यान्ति, अतः ते दुर्गम-मार्ग-निर्गमम् समस्त-सम्बाधम् अनर्थ-पञ्जरम् विशन्ति।
Summary AI Kings who follow base men and stray from the path advised by the wise enter a cage of calamities—a place crowded with obstacles from which exit is nearly impossible.
सारांश AI जो राजा नीच जनों का अनुसरण कर विद्वानों के मार्ग का त्याग करते हैं, वे कष्टों के उस दुर्गम पिंजरे में फंस जाते हैं जहाँ से निकलना असंभव है।
पदच्छेदः AI
नराधिपाःनरअधिप (१.३) kings
नीच-जनानुवर्तिनःनीचजनअनुवर्तिन् (१.३) following low people
बुधोपदिष्टेनबुधउपदिष्ट (उप√दिश्+क्त, ३.१) instructed by the wise
पथापथ् (३.१) by the path
not
यान्तियान्ति (√या कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) go
येयद् (१.३) who
विशन्तिविशन्ति (√विश् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) enter
अतःअतः therefore, from this
दुर्गम-मार्ग-निर्गमम्दुर्गममार्गनिर्गम (२.१) from which the exit path is difficult to traverse
समस्त-सम्बाधम्समस्तसम्बाध (२.१) full of all obstacles
अनर्थ-पञ्जरम्अनर्थपञ्जर (२.१) a cage of misfortunes
छन्दः वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२
रा धि पा नी ना नु र्ति नो
बु धो दि ष्टे था या न्ति ये
वि न्त्य तो दु र्ग मा र्ग नि र्ग मं
स्त म्बा र्थ ञ्ज रम्
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