अन्वयः
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आपत्-अर्थे धनं रक्षेत्, धनैः अपि दारान् रक्षेत्, दारैः अपि धनैः अपि आत्मानं सततं रक्षेत्।
Summary
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One should save wealth for times of calamity, protect one's wife even with that wealth, but must always protect oneself even at the cost of both wife and wealth.
सारांश
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विपत्ति के समय के लिए धन की रक्षा करें, धन से पत्नी की रक्षा करें, किंतु धन और पत्नी दोनों का त्याग करके भी सदैव स्वयं के प्राणों की रक्षा करनी चाहिए।
पदच्छेदः
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| आपदर्थे | आपद्–अर्थ (७.१) | for the sake of calamity |
| धनम् | धन (२.१) | wealth |
| रक्षेत् | रक्षेत् (√रक्ष् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | should protect |
| दारान् | दारा (२.३) | wives |
| रक्षेत् | रक्षेत् (√रक्ष् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | should protect |
| धनैः | धन (३.३) | with wealth |
| अपि | अपि | even |
| आत्मानम् | आत्मन् (२.१) | oneself |
| सततम् | सतत (२.१) | always |
| रक्षेत् | रक्षेत् (√रक्ष् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | should protect |
| दारैः | दारा (३.३) | with wives |
| अपि | अपि | even |
| धनैः | धन (३.३) | with wealth |
| अपि | अपि | even |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | प | द | र्थे | ध | नं | र | क्षे |
| द्दा | रा | न्र | क्षे | द्ध | नै | र | पि |
| आ | त्मा | नं | स | त | तं | र | क्षे |
| द्दा | रै | र | पि | ध | नै | र | पि |
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