अन्वयः
AI
निरन्तर-रचिते सुहृदि, गुणवति भृत्ये, अनुवर्तिनि कलत्रे, शक्ति-समेते स्वामिनि दुःखम् निवेद्य सुखी भवति ।
Summary
AI
By sharing one's sorrows with a loyal friend, a virtuous servant, an obedient wife, and a powerful master, one finds happiness.
सारांश
AI
निरंतर साथ रहने वाले मित्र, गुणी सेवक, आज्ञाकारी पत्नी और सामर्थ्यवान स्वामी को अपना दुःख बता देने पर मनुष्य के मन को शांति और सुख मिलता है।
पदच्छेदः
AI
| सुहृदि | सुहृद् (७.१) | in a friend |
| निरन्तर-रचिते | निरन्तर–रचित (७.१) | constantly devoted |
| गुणवति | गुणवत् (७.१) | in a virtuous one |
| भृत्ये | भृत्य (७.१) | in a servant |
| अनुवर्तिनि | अनुवर्तिन् (७.१) | in an obedient one |
| कलत्रे | कलत्र (७.१) | in a wife |
| स्वामिनि | स्वामिन् (७.१) | in a master |
| शक्ति-समेते | शक्ति–समेत (७.१) | endowed with power |
| निवेद्य | निवेद्य (नि√निवेद्+ल्यप्) | having reported |
| दुःखं | दुःख (२.१) | sorrow |
| सुखी | सुखिन् (१.१) | happy |
| भवति | भवति (√भू कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | becomes |
छन्दः
आर्या []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सु | हृ | दि | नि | र | न्त | र | र | चि | ते | |||
| गु | ण | व | ति | भृ | त्ये | ऽनु | व | र्ति | नि | क | ल | त्रे |
| स्वा | मि | नि | श | क्ति | स | मे | ते | |||||
| नि | वे | द्य | दुः | खं | सु | खी | भ | व | ति |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.