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अरक्षितं तिष्ठति दैवरक्षितं
सुरक्षितं दैवहतं विनश्यति ।
जीवत्यनाथोऽपि वने विसर्जितः
कृतप्रयत्नोऽपि गृहे न जीवति ॥

अन्वयः AI दैव-रक्षितम् अरक्षितम् तिष्ठति, सुरक्षितम् दैव-हतम् विनश्यति । वने विसर्जितः अनाथः अपि जीवति, गृहे कृत-प्रयत्नः अपि न जीवति ।
Summary AI What is unprotected survives if protected by destiny, while even what is well-guarded perishes if struck by fate. An orphan abandoned in the forest survives, while one in a home dies despite all efforts.
सारांश AI भाग्य द्वारा रक्षित वस्तु असुरक्षित होकर भी बची रहती है, किंतु भाग्य का साथ न होने पर सुरक्षित वस्तु भी नष्ट हो जाती है। वन में त्यागा गया अनाथ जीवित रह सकता है, पर घर में जतन करने पर भी कोई नहीं बचता।
पदच्छेदः AI
अरक्षितम्रक्षित (१.१) unprotected
तिष्ठतितिष्ठति (√स्था कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) remains
दैव-रक्षितम्दैवरक्षित (१.१) protected by fate
सुरक्षितम्सुरक्षित (१.१) well-protected
दैव-हतम्दैवहत (१.१) struck by fate
विनश्यतिविनश्यति (वि√नश् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) perishes
जीवतिजीवति (√जीव् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) lives
अनाथोऽपिअनाथ (१.१)अपि even an orphan
वनेवन (७.१) in the forest
विसर्जितःविसर्जित (वि√सृज्+क्त, १.१) abandoned
कृत-प्रयत्नोऽपिकृतप्रयत्न (१.१)अपि even one who has made effort
गृहेगृह (७.१) in the house
not
जीवतिजीवति (√जीव् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) lives
छन्दः वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२
क्षि तं ति ष्ठ ति दै क्षि तं
सु क्षि तं दै तं वि श्य ति
जी त्य ना थो ऽपि ने वि र्जि तः
कृ प्र त्नो ऽपि गृ हे जी ति
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