अन्वयः
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पर-देश-भयात् भीताः बहु-मायाः नपुंसकाः काकाः कापुरुषाः मृगाः च स्व-देशे निधनं यान्ति ।
Summary
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Crows, cowards, and deer—fearful of foreign lands, full of pretension, and lacking virility—meet their end in their own homeland.
सारांश
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परदेश जाने के भय से डरे हुए कपटी, नपुंसक, कायर पुरुष, कौवे और मृग अपने ही देश में रहकर मृत्यु को प्राप्त होते हैं।
पदच्छेदः
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| पर-देश-भयात् | पर–देश–भय (५.१) | from fear of a foreign land |
| भीताः | भीत (१.३) | frightened |
| बहु-मायाः | बहु–माया (१.३) | full of deceit |
| नपुंसकाः | नपुंसक (१.३) | cowards |
| स्व-देशे | स्व–देश (७.१) | in their own country |
| निधनम् | निधन (२.१) | death |
| यान्ति | यान्ति (√या कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | go |
| काकाः | काक (१.३) | crows |
| कापुरुषाः | कापुरुष (१.३) | cowardly men |
| मृगाः | मृग (१.३) | deer |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | र | दे | श | भ | या | त्भी | ता |
| ब | हु | मा | या | न | पुं | स | काः |
| स्व | दे | शे | नि | ध | नं | या | न्ति |
| का | काः | का | पु | रु | षा | मृ | गाः |
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