अन्वयः
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यः नरः पराभव-सन्त्रस्तः स्व-स्थानम् सन्त्यजेत् तेन चेत् माता पुत्रिणी भवति तत् वन्ध्या केन कथ्यते?
Summary
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If a mother is considered to have a son because of a man who abandons his own place out of fear of defeat, then who can be called a barren woman?
सारांश
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जो मनुष्य पराजय के भय से अपने स्थान या जिम्मेदारी को छोड़कर भाग जाता है, उसकी माता को पुत्रवती कहना व्यर्थ है; ऐसी संतान का होना न होने के समान ही है।
पदच्छेदः
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| यः | यद् (१.१) | who |
| पराभव-सन्त्रस्तः | पराभव–सन्त्रस्त (सम्√त्रस्+क्त, १.१) | terrified by defeat |
| स्व-स्थानम् | स्व–स्थान (२.१) | own place |
| सन्त्यजेत् | त्यज् (सम्√त्यज्) | should abandon |
| नरः | नर (१.१) | man |
| तेन | तद् (३.१) | by him |
| चेत् | चेत् | if |
| पुत्रिणी | पुत्रिन् (१.१) | having a son/child |
| माता | मातृ (१.१) | mother |
| तत् | तत् | then |
| वन्ध्या | वन्ध्या (१.१) | barren |
| केन | किम् (३.१) | by whom |
| कथ्यते | कथ | is called |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| यः | प | रा | भ | व | स | न्त्र | स्तः |
| स्व | स्था | नं | स | न्त्य | जे | न्न | रः |
| ते | न | चे | त्पु | त्रि | णी | मा | ता |
| त | द्व | न्ध्या | के | न | क | थ्य | ते |
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