अन्वयः
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बलवन्तम् रिपुम् दृष्ट्वा किल आत्मानम् प्रगोपयेत् । बलवद्भिः च शरत्-चंद्र-प्रकाशता कर्तव्या ॥
Summary
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Seeing a powerful enemy, one should indeed protect oneself. Even the powerful should exhibit the clarity and calmness of the autumn moon when necessary.
सारांश
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शक्तिशाली शत्रु को देखकर अपनी रक्षा करनी चाहिए; साथ ही समर्थ व्यक्ति को शरद ऋतु के चंद्रमा के समान अपनी शक्ति को सौम्यता और स्पष्टता के साथ प्रकट करना चाहिए।
पदच्छेदः
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| बलवन्तं | बलवत् (२.१) | strong |
| रिपुं | रिपु (२.१) | enemy |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश्+क्त्वा) | having seen |
| किलात्मानं | – | indeed oneself |
| प्रगोपयेत् | प्रगोपयेत् (प्र√गोप् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | should protect |
| बलवद्भिश्च | – | and by strong ones |
| कर्तव्या | कर्तव्य (√कृ+तव्य, १.१) | should be done |
| शरच्चन्द्रप्रकाशता | शरत्–चन्द्र–प्रकाशता (१.१) | the brightness of the autumn moon |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ब | ल | व | न्तं | रि | पुं | दृ | ष्ट्वा |
| कि | ला | त्मा | नं | प्र | गो | प | येत् |
| ब | ल | व | द्भि | श्च | क | र्त | व्या |
| श | र | च्च | न्द्र | प्र | का | श | ता |
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