ललाटदेशे रुधिरं स्रवत्तु
शूरस्य यस्य प्रविशेच्च वक्त्रे ।
तत्सोमपानेन समं भवेच्च
सङ्ग्रामयज्ञे विधिवत्प्रदिष्टम् ॥
ललाटदेशे रुधिरं स्रवत्तु
शूरस्य यस्य प्रविशेच्च वक्त्रे ।
तत्सोमपानेन समं भवेच्च
सङ्ग्रामयज्ञे विधिवत्प्रदिष्टम् ॥
शूरस्य यस्य प्रविशेच्च वक्त्रे ।
तत्सोमपानेन समं भवेच्च
सङ्ग्रामयज्ञे विधिवत्प्रदिष्टम् ॥
अन्वयः
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सङ्ग्राम-यज्ञे यस्य शूरस्य ललाट-देशे स्रवत् रुधिरं वक्त्रे प्रविशेत् तु तत् सोम-पानेन समं भवेत् च इति विधिवत् प्रदिष्टम् ॥
Summary
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In the sacrifice of battle, if the blood flowing from the forehead of a hero enters his mouth, it is ordained by rule to be equal to the drinking of Soma juice.
सारांश
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युद्ध रूपी यज्ञ में शूरवीर के मस्तक से बहता हुआ रक्त जब उसके मुख में प्रवेश करता है, तो उसे शास्त्रों में सोमपान के समान पवित्र और फलदायी बताया गया है।
पदच्छेदः
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| ललाटदेशे | ललाट–देश (७.१) | on the forehead |
| रुधिरं | रुधिर (१.१) | blood |
| स्रवत्तु | – | flowing indeed |
| शूरस्य | शूर (६.१) | of a hero |
| यस्य | यद् (६.१) | whose |
| प्रविशेच्च | – | and should enter |
| वक्त्रे | वक्त्र (७.१) | into the mouth |
| तत्सोमपानेन | – | that with drinking Soma |
| समं | सम (१.१) | equal |
| भवेच्च | – | and should be |
| सङ्ग्रामयज्ञे | सङ्ग्राम–यज्ञ (७.१) | in the sacrifice of battle |
| विधिवत्प्रदिष्टम् | विधिवत्–प्रदिष्ट (प्र√प्रदिष्ट+क्त, १.१) | prescribed according to rules |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ल | ला | ट | दे | शे | रु | धि | रं | स्र | व | त्तु |
| शू | र | स्य | य | स्य | प्र | वि | शे | च्च | व | क्त्रे |
| त | त्सो | म | पा | ने | न | स | मं | भ | वे | च्च |
| स | ङ्ग्रा | म | य | ज्ञे | वि | धि | व | त्प्र | दि | ष्टम् |
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