गुरोरप्यवलिप्तस्य कार्याकार्यमजानतः ।
उत्पथप्रतिपन्नस्य परित्यागो विधीयते ॥

अन्वयः AI अवलिप्तस्य कार्य-अकार्यम् अजानतः उत्पथ-प्रतिपन्नस्य गुरोः अपि परित्यागः विधीयते ॥
Summary AI One is enjoined to abandon even a teacher if they are conceited, unable to distinguish between what should and should not be done, and have set out upon a wrong path.
सारांश AI यदि गुरु भी अहंकारी हो जाए, उसे कर्तव्य और अकर्तव्य का ज्ञान न रहे और वह गलत मार्ग पर चलने लगे, तो शास्त्रानुसार उसे त्याग देना ही उचित है।
पदच्छेदः AI
गुरोःगुरु (६.१) of a teacher
अपिअपि even
अवलिप्तस्यअवलिप्त (अव√लिप्+क्त, ६.१) of one who is arrogant
कार्याकार्यम्कार्यअकार्य (२.१) what is right and wrong
अजानतःअजानत् (न√ज्ञा+शतृ, ६.१) who does not know
उत्पथप्रतिपन्नस्यउत्पथप्रतिपन्न (प्रति√प्रतिपन्न+क्त, ६.१) who has gone astray
परित्यागःपरित्याग (१.१) abandonment
विधीयतेविधीयते (वि√धा भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) is prescribed
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
गु रो प्य लि प्त स्य
का र्या का र्य जा तः
त्प प्र ति न्न स्य
रि त्या गो वि धी ते
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