अन्वयः
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अहो खल-भुजङ्गस्य वध-क्रमः विपरीततः अस्ति । सः अन्यस्य कर्णे लगति च अन्यः प्राणैः वियुज्यते ॥
Summary
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Oh, the method of destruction employed by the wicked serpent-like person is quite contrary. He whispers into the ear of one individual, but it is another person entirely who is deprived of their life.
सारांश
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दुष्ट रूपी सर्प के वध करने का ढंग बड़ा विचित्र है; वह कान तो किसी एक के लगाता है अर्थात चुगली करता है, पर प्राण किसी दूसरे निर्दोष के निकल जाते हैं।
पदच्छेदः
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| अहो | अहो | Oh |
| खलभुजङ्गस्य | खल–भुजङ्ग (६.१) | of the wicked serpent |
| विपरीत: | विपरीत (१.१) | reverse |
| वधक्रमः | वध–क्रम (१.१) | order of killing |
| कर्णे | कर्ण (७.१) | in the ear |
| लगति | लगति (√लग् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | touches |
| च | च | and |
| अन्यस्य | अन्य (६.१) | of another |
| प्राणैः | प्राण (३.३) | from life |
| अन्यः | अन्य (१.१) | another |
| वियुज्यते | वियुज्यते (वि√युज् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is separated |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | हो | ख | ल | भु | ज | ङ्ग | स्य |
| वि | प | री | तो | व | ध | क्र | मः |
| क | र्णे | ल | ग | ति | चा | न्य | स्य |
| प्रा | णै | र | न्यो | वि | यु | ज्य | ते |
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