अन्वयः
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बालिशः लोकः कर्ण-विषेण भग्नः च किं किं न करोति? सः क्षपणकताम् अपि धत्ते, नरक-पालेन सुराम् पिबति।
Summary
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What will a foolish person, broken by the poison of malicious gossip in his ear, not do? He may even adopt the life of a mendicant or drink wine with a keeper of hell.
सारांश
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कानों में भरी गई चुगली रूपी विष से भ्रमित होकर मूर्ख व्यक्ति अनुचित कार्य करने लगता है और अपना धर्म एवं आचरण त्याग देता है।
पदच्छेदः
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| कर्ण | कर्ण | ear |
| विषेण | विष (३.१) | by poison |
| च | च | and |
| भग्नः | भग्न (√भञ्ज्+क्त, १.१) | corrupted |
| किम् | किम् (२.१) | what |
| किम् | किम् (२.१) | what |
| न | न | not |
| करोति | करोति (√कृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | does |
| बालिशः | बालिश (१.१) | foolish |
| लोकः | लोक (१.१) | person |
| क्षपणक | क्षपणक | Jain ascetic |
| ताम् | ता (२.१) | state of being |
| अपि | अपि | even |
| धत्ते | धत्ते (√धा कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | assumes |
| पिबति | पिबति (√पा कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | drinks |
| सुराम् | सुरा (२.१) | liquor |
| नरक | नरक | hell |
| पालेन | पाल (३.१) | by the guardian |
छन्दः
आर्या []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | र्ण | वि | षे | ण | च | भ | ग्नः | |||
| किं | किं | न | क | रो | ति | बा | लि | शो | लो | कः |
| क्ष | प | ण | क | ता | म | पि | ध | त्ते | ||
| पि | ब | ति | सु | रां | न | र | क | पा | ले | न |
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